क्या हमें स्वयं को द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग में स्वयं को शामिल कराने के लिए AISCSA को सहयोग करना है अथवा नहीं ?

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Anurag Srivastava Aisca:
*आदरणीय मित्रों,जैसाकि आप सभी लोग जानते हैं कि अधीनस्थ न्यायालय के कर्मचारियों को प्रथम राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग(शेट्टी आयोग) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से शामिल किया गया।*
*न्यायिक अधिकारियों को इ.पदमनाभन कमेटी का भी लाभ मिल गया और अब द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग(रेड्डी आयोग) के तहत अंतरिम राहत भी मिल गयी । न तो पदमनाभन कमेटी में अधीनस्थ न्यायालय के कर्मचारियों को कोई लाभ मिल सका और न ही द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग में हम लोगों को शामिल किये जाने के लिए किसी के द्वारा सार्थक प्रमाणित कदम उठाये जाने की सूचना प्राप्तहै।*
*कुछ लोगों ने यह भ्रांति फैला रखी है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिनांक 16.03.2015 के आदेश में अधीनस्थ न्यायालय के कार्मिकों के लिए अलग से वेतन आयोग बनाने से मना कर दिया है। ऐसे लोग माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की मनमानी व्याख्या कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि अधीनस्थ न्यायालय के कर्मचारियों को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 7.10.2009 का ही पूर्ण लाभ नहीं मिल सका है। मेरा आपसे व्यक्तिगत अनुरोध है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 16.03.2015 के साथ आदेश दिनांक 07.10.2009 का भी अवलोकन करें और स्वविवेक से निर्णय लें।*
*द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग को अपनी सम्पूर्ण आख्या जनवरी 2019 में प्रस्तुत कर देना है। ऐसी स्थिति में हमें ही यह निर्णय लेना है कि क्या हमें स्वयं को द्वितीय राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग में स्वयं को शामिल कराने के लिए AISCSA को सहयोग करना है अथवा नहीं !!*
*अपने कर्मचारी समुदाय के सभी साथियों को अवगत कराना चाहूँगा कि पदमनाभन कमेटी में अधीनस्थ न्यायालय के कर्मचारियों को शामिल करने व पूरे देश के अधीनस्थ न्यायालय के कर्मचारियों को एक समान वेतन,सुविधाएं देने के मेरे  प्रस्ताव को मेरे प्रदेश(उत्तर प्रदेश) के तत्कालीन प्रांतीय संगठन और अन्य राष्ट्रीय संगठन द्वारा नकार दिया गया था और मेरे द्वारा “पूरे भारत में एक समान वेतन” की मांग को लेकर  माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिट(सिविल) संख्या 462/2011 दाखिल किया गया था। जिसको गुजरात,मध्य प्रदेश के प्रांतीय संगठन द्वारा लिखित समर्थन भी दिया गया था परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हमें सर्वप्रथम अपने राज्य सरकार से मांग करने को कहा गया और रिट वापस लेने की स्वतंत्रता के साथ निर्णीत कर दिया गया था।इस रिट में हमारीअधिवक्ता वर्तमान में माननीय सर्वोच्च न्यायालय की जज श्रीमती इंदु मल्होत्रा जी थी.*
*आपका सहयोगाकांक्षी*
*डॉ.अनुराग श्रीवास्तव*
*अध्यक्ष-AISCSA*

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